UPSSSC PETQuestion 155 of 159 · अपठित गद्यांश (Hindi Unseen Passage)
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UPSSSC PET 2026 (30 Oct Shift 1)

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निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए : साहित्य और समाज का संबंध अन्योन्याश्रित एवं शाश्वत है। साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है, क्योंकि इसमें युगीन परिस्थितियों, सामाजिक चेतना, आस्थाओं और विसंगतियों का सजीव प्रतिबिंब दिखाई देता है। किंतु साहित्य केवल समाज का निष्क्रिय प्रतिबिंब मात्र नहीं है, बल्कि वह समाज का दिशा-निर्देशक और पथ-प्रदर्शक भी है। एक उच्च कोटि का साहित्यकार अपनी सूक्ष्म दृष्टि से समकालीन समस्याओं की पहचान करता है और अपनी रचनाधर्मिता के माध्यम से जनमानस को झकझोर कर जागरूक बनाता है। इतिहास साक्षी है कि जब-जब समाज में नैतिक मूल्यों का पतन हुआ है या विषमता और शोषण का अंधकार व्याप्त हुआ है, तब-तब साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से क्रांति की मशाल जलाई है। भारत के भक्ति आंदोलन से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक, कबीर, तुलसी, प्रेमचंद और दिनकर जैसे रचनाकारों ने सामाजिक कुरीतियों, धार्मिक आडंबरों और राजनीतिक पराधीनता के विरुद्ध जन-जागरण का अभूतपूर्व कार्य किया। साहित्य ने सदैव मानवीय संवेदनात्मकता, बंधुत्व और भावात्मक एकता को संपोषित किया है। आधुनिक युगीन संदर्भों में, जहाँ भौतिकतावादी दृष्टिकोण और तकनीकी होड़ के कारण मानवीय संबंध संवेदनशील न रहकर यांत्रिक होते जा रहे हैं, वहाँ साहित्य की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। साहित्य मनुष्य के भीतर की करुणा, सहानुभूति और नैतिक विवेक को जीवित रखता है। यह व्यक्ति को स्वार्थ की संकीर्ण परिधि से निकालकर समष्टि चेतना से जोड़ता है। संक्षेप में, साहित्य समाज की आत्मा है; जिस समाज का साहित्य समृद्ध नहीं होता, वह समाज वैचारिक और सांस्कृतिक रूप से निष्प्राण हो जाता है। अतः एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज के निर्माण हेतु साहित्य का संरक्षण, अनुशीलन एवं संवर्धन अनिवार्य है।

गद्यांश के अनुसार, जिस समाज में साहित्य समृद्ध नहीं होता वह समाज :

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Answer: Option B — वैचारिक और सांस्कृतिक रूप से निष्प्राण हो जाता है

Detailed Solution

गद्यांश के अंतिम अनुच्छेद में कहा गया है कि साहित्य समाज की आत्मा है और जिस समाज का साहित्य समृद्ध नहीं होता, वह समाज वैचारिक और सांस्कृतिक रूप से निष्प्राण हो जाता है, इसलिए विकल्प B सही है। तकनीकी विकास करना, राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से अधिक शक्तिशाली होना तथा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना, तीनों बातें गद्यांश में साहित्य की समृद्धि से नहीं जोड़ी गई हैं। लेखक का तर्क विचारों और संस्कृति की जीवंतता पर टिका है, भौतिक उन्नति पर नहीं, और भौतिकतावाद को तो वह संबंधों के यांत्रिक होने का कारण मानता है।

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अपठित गद्यांश (Hindi Unseen Passage) — UPSSSC PET Preparation

This question tests your understanding of अपठित गद्यांश (Hindi Unseen Passage), a key topic in the UPSSSC PET General Hindi (सामान्य हिन्दी) section. The detailed solution above uses a step-by-step approach to show the reasoning, and where available, a shortcut that helps you solve similar questions in under 90 seconds during the actual exam.

हिन्दी अपठित गद्यांश पढ़कर उत्तर देने वाले प्रश्न। UPSSSC PET के गद्यांश और प्रश्न हल सहित।