UPSSSC PETQuestion 62 of 149 · अपठित गद्यांश (Hindi Unseen Passage)
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UPSSSC PET 2025 (7 Sept Shift 2)

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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए । हिंदी साहित्य में ग्रामांचलिकता की प्रवृत्ति स्वातंत्र्योत्तर काल में पनप उठी है । महात्मा गाँधीजी के ‘देहात की ओर चलो’ इस नारे के अनुकरण पर ग्रामांचलिक साहित्य का आंदोलन शुरू हुआ । ग्रामीण लोगों का प्रबोधन करके उनमें चेतना जगाने का काम ग्रामांचलिक लेखकों ने किया है । वहाँ के जन-जीवन की समस्याओं को लोगों के सामने रखने का उद्देश्य ग्रामांचलिक साहित्यकारों में रहा है । ग्रामांचलिक साहित्य का प्रारंभ सन् 1950 के पश्चात् अधिक गति से शुरू हुआ । ग्रामीण जीवन को सही अर्थ में मुखरित करने का सफल प्रयास प्रेमचंद ने किया । अपनी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से इन्होंने ग्रामीण जीवन का मर्मस्पर्शी चित्रण किया है । प्रेमचंद के पूर्व काल में सेठ बाँकेमल के ‘घराऊ घटना’-1883, ‘वसंत मालती’-1899, ‘अधखिला फूल’-1907, ‘भोजपुरी की ठगी’-1912, ‘राधाकांत’ और ‘अरण्यक’-1915, मन्नन द्विवेदी द्वारा लिखित ‘रामलाल’-1914, शिवपूजन सहाय द्वारा लिखित ‘देहाती दुनिया’-1925 आदि उपन्यासों में प्रारंभिक स्तर पर ग्रामांचलिकता के दर्शन होते हैं । प्रेमचंद के ‘रंगभूमि’, ‘गोदान’, ‘प्रेमाश्रम’ आदि उपन्यासों में ग्रामीण जीवन, पीड़ित ग्रामीणों में उभरने वाली चेतना के दर्शन होते हैं । इनके उपन्यासों में नई सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था और परंपरागत ग्राम व्यवस्था के संक्रमण कालीन संदर्भ स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आए हैं । जयशंकर प्रसाद के ‘तितली’ में ग्राम जीवन की प्रवृत्तियों की ओर इशारा किया है । इसके बाद उदयशंकर भट्ट, अमृतलाल नागर, रांगेय राघव, देवेंद्र सत्यार्थी आदि इसी लीक पर चलते रहे, जिन्होंने ग्रामांचलिकता की मध्य स्थिति को अपनाया । हिंदी साहित्य में आँचलिकता के उन्नायक उपन्यासकार फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ रहे हैं । उनके द्वारा लिखा गया पहला आँचलिक उपन्यास ‘मैला आँचल’-1954, हिंदी का शुद्ध आँचलिक उपन्यास माना जाता है । इसके बाद आँचलिकता अधिक मात्रा में पनपती गई । आँचलिक साहित्य विविध रूपों में समृद्ध होता गया । इसका श्रेय शैलेश मटियानी, रांगेय राघव, रामदरश मिश्र, राही मासूम रजा, हिमांशु जोशी, भैरवप्रसाद गुप्त, जगदंबाप्रसाद, जगदीश गुप्त, अमृतलाल नागर, श्याम परमार, शिव प्रसाद सिंह, विवेकी राय आदि को दिया जा सकता है । सन् 1960 के पश्चात् ग्रामांचलिक धारा अधिक बलवती बनी । इसमें कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, रिपोर्ताज, रेखाचित्र आदि को यथावत स्थान प्राप्त हुआ ।

ग्रामांचलिक साहित्य का प्रारंभ सन् _______ के पश्चात् अधिक गति से शुरू हुआ ।

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Answer: Option A — 1950

Detailed Solution

गद्यांश के दूसरे अनुच्छेद के अनुसार ग्रामांचलिक साहित्य का प्रारंभ सन् 1950 के पश्चात् अधिक गति से शुरू हुआ। वर्ष 1954 ‘मैला आँचल’ के प्रकाशन का है और 1960 के बाद यह धारा अधिक बलवती बनी।

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अपठित गद्यांश (Hindi Unseen Passage) — UPSSSC PET Preparation

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हिन्दी अपठित गद्यांश पढ़कर उत्तर देने वाले प्रश्न। UPSSSC PET के गद्यांश और प्रश्न हल सहित।