UPSSSC PETQuestion 33 of 40 · अपठित गद्यांश (Hindi Unseen Passage)
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UPSSSC PET 2025 (6 Sept Shift 1)

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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए । मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि इतने दिनों तक अंग्रेजों की अनुवर्तिता करने के बाद भी भारतवर्ष ‘इण्डिपेण्डेन्स’ को अनधीनता क्यों नहीं कह सका ? उसने अपनी आजादी के जितने भी नामकरण किये - स्वतन्त्रता, स्वराज्य, स्वाधीनता - उन सब में ‘स्व’ का बन्धन अवश्य रखा । यह क्या संयोग की बात है या हमारी समूची परम्परा ही अनजान में, हमारी भाषा के द्वारा प्रकट होती रही है ? मुझे प्राणि-विज्ञानी की बात फिर याद आती है - सहजात वृत्ति अनजानी स्मृतियों का ही नाम है । स्वराज होने के बाद स्वभावतः ही हमारे नेता और विचारशील नागरिक सोचने लगे हैं कि इस देश को सच्चे अर्थ में सुखी कैसे बनाया जाय । हमारे देश के लोग पहली बार यह सब सोचने लगे हों, ऐसी बात नहीं है । हमारा इतिहास बहुत पुराना है, हमारे शास्त्रों में इस समस्या को नाना भावों और नाना पहलुओं से विचारा गया है । हम कोई नौसिखुए नहीं हैं, जो रातों-रात अनजान जंगल में पहुँचाकर अरक्षित छोड़ दिये गये हों । हमारी परम्परा महिमामयी, उत्तराधिकार विपुल और संस्कार उज्ज्वल है । हमारे अनजान में भी ये बातें हमें एक खास दिशा में सोचने की प्रेरणा देती हैं । यह जरूर है कि परिस्थितियाँ बदल गयी हैं । उपकरण नये हो गये हैं और उलझनों की माया भी बहुत बढ़ गयी है, पर मूल समस्याएँ बहुत अधिक नहीं बदली हैं । भारतीय चित्त जो आज भी ‘अनधीनता’ के रूप में न सोचकर ‘स्वाधीनता’ के रूप में सोचता है, वह हमारे दीर्घकालीन संस्कारों का फल है । वह ‘स्व’ के बन्धन को आसानी से नहीं छोड़ सकता । अपने-आप पर अपने-आप के द्वारा लगाया हुआ बन्धन हमारी संस्कृति की बड़ी भारी विशेषता है । मैं ऐसा तो नहीं मानता कि जो कुछ हमारा पुराना है, जो कुछ हमारा विशेष है, उससे हम चिपटे ही रहें । पुराने का ‘मोह’ सब समय वाञ्छनीय ही नहीं होता । मरे बच्चे को गोद में दबाये रहनेवाली ‘बँदरिया’ मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती । परन्तु मैं ऐसा भी नहीं सोच सकता कि हम नयी अनुसन्धित्सा के नशे में चूर होकर अपना सरबस खो दें । कालिदास ने कहा था कि सब पुराने अच्छे ही नहीं होते, सब नये खराब ही नहीं होते ।

लेखकजी को प्राणि-विज्ञानियों की कौन-सी बात याद आती है ?

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Answer: Option C — सहजात वृत्ति अनजानी स्मृतियों का ही नाम है ।

Detailed Solution

लेखक को प्राणि-विज्ञानी की यह बात याद आती है कि ‘सहजात वृत्ति अनजानी स्मृतियों का ही नाम है’।

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अपठित गद्यांश (Hindi Unseen Passage) — UPSSSC PET Preparation

This question tests your understanding of अपठित गद्यांश (Hindi Unseen Passage), a key topic in the UPSSSC PET General Hindi (सामान्य हिन्दी) section. The detailed solution above uses a step-by-step approach to show the reasoning, and where available, a shortcut that helps you solve similar questions in under 90 seconds during the actual exam.

हिन्दी अपठित गद्यांश पढ़कर उत्तर देने वाले प्रश्न। UPSSSC PET के गद्यांश और प्रश्न हल सहित।