UPSSSC PETQuestion 136 of 149 · अपठित गद्यांश (Hindi Unseen Passage)
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UPSSSC PET 2023 (29 Oct Shift 1)

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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : हमारे बाल्यकाल के संस्कार ही जीवन का ध्येय निर्धारित करते हैं, अतः यदि शैशव में हमारी संतान ऐसे व्यक्तियों की छाया में ज्ञान प्राप्त करेगी, जिनमें चरित्र तथा सिद्धांत की विशेषता नहीं है, जिनमें संस्कारजनित अनेक दोष हैं, तो फिर उनके चरित्र पर भी उसी की छाप पड़ेगी और भविष्य में उनके ध्येय भी उसी के अनुसार स्वार्थमय तथा अस्थिर होंगे । शिक्षा एक ऐसा कर्तव्य नहीं है जो किसी पुस्तक को प्रथम पृष्ठ से अंतिम पृष्ठ तक पढ़ाने से ही पूर्ण हो जाता हो, वरन् वह ऐसा कर्तव्य है जिसकी परिधि सारे जीवन को घेरे हुए है और पुस्तकें ऐसे साँचे हैं जिनमें ढालकर उसे सुडौल बनाया जा सकता है । आत्मनिर्भरता का अर्थ है – अपने ऊपर निर्भर रहना । जो व्यक्ति दूसरे के मुँह को नहीं ताकते वे ही आत्मनिर्भर होते हैं । वस्तुतः आत्मविश्वास के बल पर कार्य करते रहना आत्मनिर्भरता है । आत्मनिर्भरता का अर्थ है – समाज, निज तथा राष्ट्र की आवश्यकताओं की पूर्ति करना । व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र में आत्मविश्वास की भावना, आत्मनिर्भरता का प्रतीक है । स्वावलंबन जीवन की सफलता की पहली सीढ़ी है । सफलता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को स्वावलंबी अवश्य होना चाहिए । स्वावलंबन व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के जीवन में सर्वांगीण सफलता-प्राप्ति का महामंत्र है । स्वावलंबन जीवन का अमूल्य आभूषण है, वीरों तथा कर्मयोगियों का इष्टदेव है । सर्वांगीण उन्नति का आधार है । जब व्यक्ति स्वावलंबी होगा, उसमें आत्मनिर्भरता होगी, तो ऐसा कोई कार्य नहीं जिसे वह न कर सके । स्वावलंबी मनुष्य के सामने कोई भी कार्य आ जाए, वह अपने दृढ़ विश्वास से, अपने आत्मबल से उसे अवश्य ही पूर्ण कर लेगा । स्वावलंबी मनुष्य जीवन में कभी भी असफलता का मुँह नहीं देखता । वह जीवन के हर क्षेत्र में निरंतर कामयाब होता जाता है । सफलता तो स्वावलंबी मनुष्य की दासी बनकर रहती है । जिस व्यक्ति का स्वयं अपने आप पर ही विश्वास नहीं, वह भला क्या कर पाएगा ? परंतु इसके विपरीत जिस व्यक्ति में आत्मनिर्भरता होगी, वह कभी किसी के सामने नहीं झुकेगा । वह जो करेगा सोच समझकर धैर्य से करेगा । मनुष्य में सबसे बड़ी कमी स्वावलंबन का न होना है । सबसे बड़ा गुण भी मनुष्य की आत्मनिर्भरता ही है ।

सर्वांगीण सफलता-प्राप्ति का महामंत्र लेखक के अनुसार क्या है ?

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Answer: Option C — आत्मनिर्भरता और आत्मबल

Detailed Solution

गद्यांश में लिखा है कि स्वावलंबन व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के जीवन में सर्वांगीण सफलता-प्राप्ति का महामंत्र है, और स्वावलंबन का अर्थ ही आत्मनिर्भरता है ।

तीसरे अनुच्छेद में यह भी कहा गया है कि स्वावलंबी व्यक्ति अपने आत्मबल से हर कार्य पूरा कर लेता है, इसलिए विकल्प (C) सही है; सहनशीलता, संस्कार या स्नेहयुक्त व्यवहार को महामंत्र नहीं कहा गया है ।

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अपठित गद्यांश (Hindi Unseen Passage) — UPSSSC PET Preparation

This question tests your understanding of अपठित गद्यांश (Hindi Unseen Passage), a key topic in the UPSSSC PET General Hindi (सामान्य हिन्दी) section. The detailed solution above uses a step-by-step approach to show the reasoning, and where available, a shortcut that helps you solve similar questions in under 90 seconds during the actual exam.

हिन्दी अपठित गद्यांश पढ़कर उत्तर देने वाले प्रश्न। UPSSSC PET के गद्यांश और प्रश्न हल सहित।